हिंदी कविता- मोबाइल का असर समाज पर

मोबाइल ने बदला समय का रंग,
हर हाथ में अब इसका संग।
दूरियों को इसने पास बनाया,
पर अपनों से दिलों को दूर कराया।
हर उम्र का साथी बना,
दुनिया को मुट्ठी में समेटा।
पर बातें दिल की रह गई अधूरी,
संबंधों में पड़ गई दूरी।
ज्ञान का भंडार, सूचना की धारा,
पर समय का भी ये बड़ा सहारा।
भूल गए रिश्तों की गर्माहट,
मोबाइल में खो गया अपनापन।
खेल-कूद का जोश गुम हुआ,
हर बच्चा स्क्रीन में झुका हुआ।
बड़ों का आदर, बचपन की मस्ती,
मोबाइल के आगे सब हुई सस्ती।
पर सोचो, ये साधन ही तो है,
इसे सही राह दिखाना जो है।
समझदारी से करें इसका उपयोग,
तभी समाज का बनेगा भव्य स्वरूप।
चलो, मोबाइल का सम्मान करें,
पर रिश्तों का भी मान धरें।
तकनीक से जीवन को सवारें,
पर इंसानियत को न बिसारें।
