आशा का दीपक, by Sunil Prakash

जब राहों में अंधेरा हो,
और सपनों पर धुंध छाई हो।
तब भी मन के आंगन में,
आशा की एक लौ जगाई हो।
हर रात के बाद सुबह है,
हर दर्द के बाद मुस्कान है।
विश्वास रखना तुम खुद पर,
क्योंकि भगवान के द्वार में चमत्कार है।
जो आज अधूरी सी लगती है दुआ,
वो कल बन जाएगी मीठी स्वाद।
हिम्मत से थामे रखना हाथ सपनों का,
कल खिलेगा आंगन तुम्हारे अपने फूलों का।
सुनील प्रकाश
