चतुर खरगोश और शेर की कहानी!

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बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में जानवर बड़े सुख-शांति से रहते थे। उस जंगल में एक शेर भी रहता था। वह बड़ा ही क्रूर और घमंडी था। जंगल के जानवरों को हर रोज डर सताता कि शेर कब किसे अपना शिकार बना ले।

शेर का आतंक

शेर रोज जंगल के किसी न किसी जानवर को मारकर खा जाता था। इससे जंगल के सभी जानवर परेशान थे। एक दिन सारे जानवरों ने मिलकर शेर के पास जाने का फैसला किया। वे शेर से बोले, “महाराज, आप जंगल के राजा हैं। अगर आप हर रोज हमें मारेंगे, तो एक दिन कोई जानवर बचेगा ही नहीं। कृपया हमारी बात सुनिए।”

शेर ने गरजते हुए कहा, “क्या बात है? जल्दी कहो, नहीं तो तुम सबको यहीं खा जाऊंगा।”

समझौता

सभी जानवरों ने डरते हुए कहा, “महाराज, हम हर रोज एक जानवर को खुद आपके पास भेज देंगे। आप उसे खाकर संतुष्ट हो जाइए। इससे आपको शिकार पर समय भी नहीं बर्बाद करना पड़ेगा, और बाकी जानवर भी चैन की सांस लेंगे।”

शेर ने थोड़ी देर सोचा और बोला, “ठीक है। अगर तुम रोज एक जानवर को मेरे पास भेजोगे, तो मैं खुद शिकार नहीं करूंगा। लेकिन अगर किसी दिन कोई जानवर न आया, तो मैं सारे जानवरों को मार दूंगा।”

योजना शुरू

उस दिन से रोज एक जानवर शेर के पास जाने लगा। शेर उन्हें खाकर खुश हो जाता। लेकिन जंगल के जानवर अब भी डरे हुए थे क्योंकि हर दिन किसी न किसी की बारी आती।

कुछ दिनों बाद खरगोशों की बारी आई। सभी खरगोश दुखी हो गए। उनमें से एक छोटा, पर बड़ा ही चतुर खरगोश बोला, “डरो मत, दोस्तों। मैं इस समस्या का हल निकालूंगा।”

चतुर खरगोश की योजना

अगले दिन वह छोटा खरगोश शेर के पास जाने के लिए तैयार हुआ। लेकिन उसने जान-बूझकर रास्ते में देर कर दी। शेर भूखा था और क्रोधित भी। जैसे ही वह खरगोश के पास पहुंचा, उसने गरजते हुए पूछा, “तुम इतनी देर क्यों आए?”

खरगोश ने विनम्रता से कहा, “महाराज, मैं तो समय पर आना चाहता था, लेकिन रास्ते में मुझे एक और शेर मिला। उसने मुझे रोक लिया और कहा कि वह इस जंगल का असली राजा है।”

शेर की जलन

शेर यह सुनकर आग-बबूला हो गया। उसने गरजते हुए कहा, “कौन है वह दुस्साहसी? मेरे जंगल में दूसरा राजा? मुझे उसके पास ले चलो।”

खरगोश ने चालाकी से कहा, “महाराज, वह एक कुएं के पास रहता है। उसने मुझे वहीं रोका था। अगर आप चाहें, तो मैं आपको वहां ले चलूंगा।”

कुएं का रहस्य

खरगोश शेर को जंगल के एक पुराने कुएं के पास ले गया। उसने शेर से कहा, “महाराज, वह शेर इसी कुएं में रहता है।” शेर गुस्से में आग-बबूला होकर कुएं के पास गया और उसमें झांका। कुएं के पानी में उसे अपनी ही परछाई नजर आई।

शेर ने समझा कि यह वही दूसरा शेर है। उसने जोर से दहाड़ लगाई, तो कुएं से भी वैसी ही दहाड़ सुनाई दी। शेर को लगा कि दूसरा शेर उसे चुनौती दे रहा है। गुस्से में आकर शेर ने कुएं में छलांग लगा दी।

खरगोश की जीत

शेर कुएं के गहरे पानी में डूब गया। अब जंगल के सारे जानवर आजाद हो गए। सबने चतुर खरगोश की जमकर प्रशंसा की।

इस तरह, छोटे से खरगोश ने अपनी चतुराई और साहस से पूरे जंगल को शेर के आतंक से मुक्त कर दिया।


सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुद्धि और चतुराई से बड़ी से बड़ी समस्या को हल किया जा सकता है, भले ही हमारी ताकत कम क्यों न हो।

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